डोनाल्ड ट्रम्प के मुस्लिम दुश्मनी के मंसूबे को अदालत ने रोका

डोनाल्ड ट्रम्प के मुस्लिम दुश्मनी के मंसूबे को अदालत ने रोका

सान फ्रांसिस्को! अमरीका में सान फ्रांसिस्को की अपील पर कोर्ट ने सवाल किया है कि क्या सदर डोनाल्ड ट्रम्प के जरिए लगाई जाने वाली सफरी पाबंदी सिर्फ मुसलमानों के खिलाफ है? सात फरवरी को अदालत नाईंथ यूएस सर्किट कोर्ट आफ अपील्ज में तीन रूक्नी बेंच के मेम्बर जस्टिस रिचर्ड क्लिफ्टन ने अदालती कार्रवाई के दौरान सवाल किया कि अगर इस पाबंदी से पूरी दुनिया में मौजूद सिर्फ 15 फीसद मुसलमान मुतास्सिर हो रहे हों तो क्या यह पाबंदी भेदभाव वाली कहलाई जा सकती है या नहीं?

इस कार्रवाई में दोनों फरीकैन की तरफ से एक घंटे तक दलायल दिए जाते रहे जहां अमरीकी मोहकमा इंसाफ ने पहले अपना मौकुफ बयान किया और अदालत से अपील कि इस पाबंदी को बहाल किया जाए।

मोहकमा इंसाफ के वकील अगस्ता फलैंटजे ने अदालत को बताया कि कांग्रेस ने सदर को इस बात का मजाज बनाया है कि वह मुल्क में दाखिल होने वालों पर काबू रख सकें। जब उनसे पूछा गया कि इस बात का क्या सबूत है कि ईरान, इराक, लीबिया, सोमालिया, सीरिया, यमन और सूडान के शहरी अमरीका के लिए खतरे का सबब बन सकते हैं तो उन्होंने जवाब दिया कि अमरीका में मौजूद कई सोमाली शहरी दहशतगर्द ग्रुप  अल-शबाब के साथ जुड़े रहे हैं।

दूसरी तरफ से वाशिंगटन के वकील ने अदालत को बताया कि सफरी पाबंदी के हुक्म के मुअत्तली से अमरीकी सरकार को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचा है। वकील नूह परसल ने कहा कि इस पाबंदी से वाशिंगटन रियासत के हजारों शहरी मुतास्सिर हुए हैं, जिनमें तलबा भी शामिल है और वह लोग जो अपने खानदान से मिलना चाहते हैं।

अदालती कार्रवाई के आखिरी लम्हात में इस बात पर चर्चा हुआ कि क्या यह पाबंदी मुसलमानों को खास तौर से निशाना बना रही है या नहीं। मोहकमा इंसाफ के जारी किए गए एलानिया के मुताबिक सफरी पाबंदी में किसी मजहब को निशाना नहीं बनाया गया लेकिन अदालत में वकील नूह परसल ने सदर ट्रम्प के बयान का हवाला दिया जिससे इशारा मिलता है कि यह पाबंदी मुसलमानों के खिलाफ है।

जस्टिस रिचर्ड क्लिफ्टन ने पूछा कि यह पाबंदी सिर्फ उन सात मुल्कों के लिए है जिनके बारे में साबिक सदर ओबामा इंतजामिया ने कहा था कि वह खतरे का सबब बन सकते हैं तो क्या यह कहा जा सकता है कि सदर ओबामा के इंतजामिया ने भी मुसलमानों के साथ भेदभाव बरता था?

जवाब में वकील नूह परसल ने कहा कि ऐसा नहीं है क्योंकि सदर ट्रम्प ने मुकम्मल पाबंदी की बात की थी और यह हुक्म मुकम्मल पाबंदी तो नहीं है लेकिन इम्तियाजी जरूर है।

याद रहे कि सदर ट्रम्प के इस हुक्म के बाद अमरीका में कई जगहों पर एहतेजाजी मुजाहिरे हुए और मुल्क में सात मुल्कों के मुसाफिरों में बेचैनी और बेयकीनी की कैफियत फैल गई थी। बाद में सात मुस्लिम अक्सरियती मुल्कों के शहरियों पर अमरीका में दाखिले पर पाबंदी से मुताल्लिक एहकामात पर अमल दरामद एक अदालत की तरफ से रोक दिए जाने के बाद इन मुल्कोें के शहरी अपनों से जा मिले।

पिछले दिनों एक अमरीकी फेडरल अदालत की तरफ से अमरीकी सदर डोनाल्ड ट्रम्प के सात मुस्लिम मुल्कों के शहरियों के मुल्क में दाखिले पर पाबंदी के खात्मे के बाद एक दूसरे से बिछडे़ कई खानदान एक दूसरे से जा मिले।

अदालती हुक्मनामा सामने आने के बाद अमरीका जाने वाली सभी एयरलाइंस ने सभी लोगों को सफर की इजाजत दे दी। खबर के मुताबिक न्यूयार्क के कैनेडी हवाई अड्डे पर एक वकील ने बताया कि अदालती फैसले के बाद ईरान, इराक और पाबंदी के शिकार दीगर मुल्कोें के ऐसे शहरी जिनके पास अमरीकी वीजा था या वह ग्रीन कार्ड के हामिल थे, बेरोकटोक अमरीका पहुंच रहे हैं।

न्यूयार्क के इमीग्रेशन क्वालेशन नाम की कंपनी से जुड़े वकील कामेले मेकलर के मुताबिक, अब मामला फिर से मामूल पर लौट गया है।

32 साला ईरानी मुसव्विर फारेबा ताज रस्तमानी का कहना है कि वह जब न्यूयार्क के कैनेडी हवाई अड्डे से बाहर आईं तो उनकी आंखों में आंसू और चेहरे पर मुस्कान थी और ऐसे में उनके भाई उनसे गले मिल गए। मुझे खुशी है। मैंने अपने भाई को पिछले नौ महीने से नहीं देखा था।

अदालती फैसले के बाद हवाई अड्डों पर जज्बाती मनाजिर देखने में आए ताज रस्तमानी ने एक हफ्ता पहले तुर्की के रास्ते अमरीका पहुंचने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें रोक दिया गया था। मैं रो रही थी और बेहद उदास थी। मेरे दिमाग में सब कुछ था कि अब क्या कुछ हो सकता है। मुझे हर चीज पर अफसोस हो रहा था। मुझे लग रहा था, सब कुछ खत्म हो गया। ताज रस्तमानी का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि वह अमरीका में आर्ट की तालीम हासिल कर सकेगीं और डालास वाके अपने शौहर के पास पहुंच जाएंगी। उनके शौहर छः महीने पहले ईरान से अमरीका चले गए थे और अब उनके पास ग्रीन कार्ड है, जबकि वह एक कार्डीलर कंपनी में काम कर रहे हैं।

एक फेडरल जज की तरफ से अमरीकी सदर के पाबंदी से मुताल्लिक हुक्मनामे को मुअत्तल करने के फैसले के कुछ ही घंटों बाद अमरीका भर में हवाई अड्डों पर ऐसे ही मनाजिर देखने जाने लगे। एक वफाकी अपील अदालत ने ट्रम्प इंतजामिया की तरफ से अदालती फैसले पर नजरसानी की पटीशन दायर की थी, लेकिन उसे भी खारिज कर दिया गया।

अमरीकी सदर ट्रम्प ने सीरिया, इराक, ईरान, सूडान, सोमालिया, लीबिया और यमन के शहरियों के अमरीका में दाखिले पर पाबंदी लगा दी था, जिसके बाद अमरीकी हुक्काम ने एक हफ्ते में करीब साठ हजार गैर मुल्कियों के वीजा रद्द कर दिए। ट्रम्प ने अगले चार महीने के लिए सभी महाजरीन के मुल्क में दाखिले पर पाबंदी लगा दी है, जबकि सीरियाई महाजरीन पर यह पाबंदी गैरमुअय्यना मुद्दत के लिए है।

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