दलबदलुओं और कुन्बापरस्ती और बाहर से आने वालों को ज्यादा टिकट देकर बुरी फंसी बीजेपी – यूपी चुनाव खतरे में मोदी की साख

दलबदलुओं और कुन्बापरस्ती और बाहर से आने वालों को ज्यादा टिकट देकर बुरी फंसी बीजेपी – यूपी चुनाव खतरे में मोदी की साख

”अखिलेश यादव और राहुल गांधी की इंतखाबी मीटिंगों में जबरदस्त भीड़ देखकर समाजवादियों और कांगे्रसियों के हौसले बुलंद, नोटबंदी और अच्छे दिनों के नारे के जरिए नरेन्द्र मोदी पर सख्त सियासी हमला। अच्छे और अपने लड़कांे यानि राहुल और अखिलेश बनाम बाहरी और झूट बोलने वाले नरेन्द्र मोदी के नारे के जरिए बीजेपी को पटखनी देने की कोशिश।

 

”उत्तर प्रदेश मंे उम्मीदवारों का एलान होते ही पूरे प्रदेश के बीजेपी वर्करों ने मचाया हंगामा, लखनऊ में रियासती दफ्तर का घेराव, पुराने और वफादारों की जगह दलबदलुओं और मौकापरस्तों को उम्मीदवार बनाए जाने का इल्जाम, अपना दल और राजभर बिरादरी की पार्टी के लिए ढाई दर्जन सीटें छोड़े जाने पर भी सख्त एतराज।“

 

”बौखलाहट मंे विनय कटियार ने प्रियंका गांधी के लिए

बदजुबानी की और यह भी कह गए कि उनकी पार्टी में भी स्मृति ईरानी और हेमा मालिनी समेत बड़ी तादाद में खूबसूरत ख्वातीन हैं, हम उन्हें भी मैदान में उतारेंगे। बीजेपी बैकफुट पर, लोग यह पूछ रहे हैं कि क्या हेमा मालिनी और स्मृति ईरानी को वोट हासिल करने के लिए ही पार्टी में लिया गया है।“

 

लखनऊ! उत्तर प्रदेश असम्बली एलक्शन के लिए सभी सियासी पार्टियों के उम्मीदवारों का एलान तकरीबन मुकम्मल हो चुका है। समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस के साथ गठजोड़ करके अपनी इज्जत बचाने की कोशिशें तेज कर दी हैं। बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवरों का एलान सबसे पहले हो गया था। समाजवादी पार्टी के सीनियर लीडर अम्बिका चैधरी समेत तकरीबन आधा दर्जन लोग बीएसपी में शामिल हुए फिर कौमी एकता दल के अफजाल अंसारी ने भी बीएसपी के साथ जाने का फैसला कर लिया। इसलिए पार्टी ने तकरीबन एक दर्जन उम्मीदवार तब्दील कर दिए। इन तीनों पार्टियों में कुछ लोगों के टिकट कटने से नाराजगी भी दिखी लेकिन जितना हंगामा मोदी की बीजेपी मंे मचा किसी पार्टी में नहीं मचा। मुलायम कुन्बे में झगड़े के दौरान जो भारतीय जनता पार्टी पहले और दूसरे नम्बर के मुकाबले में आ गई थी उम्मीदवारों के एलान के बाद अब वही बीजेपी कांग्रेस के साथ तीसरे नम्बर के मुकाबले में नजर आने लगी है। बीजेपी मंे मचे घमासान की वजह से प्रदेश में सीधे-सीधे वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी की साख ही दांव पर लग गई है। शुरूआती दौर से ही बीजेपी के हामी रहे व्यापारी तबके खुसूसन सर्राफा व्यापारी ही इस वक्त नोटबंदी की वजह से बीजेपी को हराने की बातें करने ही लगे थे कि पार्टी के उम्मीदवारों के एलान ने पार्टी के लिए पैदा हुई नफरत की आग में घी डालने जैसा काम कर दिया है। कांगे्रस और अखिलेश की समाजवादी पार्टी के गठजोड़ में अजित सिंह के राष्ट्रीय लोकदल को शामिल न किए जाने से अजित सिंह ही फायदे में दिखने लगे हैं। पूरे प्रदेश में समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, बीएसपी और बीजेपी के जिन बाअसर और दौलतमंद लोगों को अपनी पार्टी में टिकट नहीं मिले थे उनमें से बेश्तर लोक दल के टिकट पर मैदान मंे हैं। अजित सिंह ने पूरे प्रदेश खुसूसन पच्छिमी उत्तर प्रदेश में जिस तरह के उम्मीदवार उतारे हैं उनकी फेहरिस्त पर एक नजर डालने से साफ लगता है कि बीस से ज्यादा सीटें तो राष्ट्रीय लोक दल भी जीत सकता है।। टिकटों के लिए आरएलडी में लगी भीड़ की वजह से सियासी एतबार से अलग-थलग पड़ चुके अजित की तो जैसे लाट्री ही निकल आई। अपने वालिद मुलायम सिंह यादव और चचा शिवपाल यादव को पूरी तरह बेदखल करके समाजवादी पार्टी पर मुकम्मल तौर पर कब्जा हासिल करने के बाद वजीर-ए-आला अखिलेश यादव ने जोर-शोर से इंतखाबी मुहिम शुरू कर दी, उनकी पब्लिक मीटिगों में जबरदस्त भीड़ तो उमड़ रही हैं लेकिन बजाहिर ऐसा लगता है कि शायद एलक्शन मुकम्मल होने के बाद प्रदेश में एक बार फिर नए सिरे से सियासी सफआराई होगी। इस बात के इमकानात काफी रौशन हैं कि अगली बार कांगे्रस, राष्ट्रीय लोक दल और बहुजन समाज पार्टी मिलकर सरकार बनाएंगे।

सभी पार्टियों पर कुन्बापरस्ती का इल्जाम लगाने वाली नरेन्द्र मोदी की भारतीय जनता पार्टी ने खुद भी इस बार कुन्बापरस्ती का भरपूर ख्याल रखा। राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह और लाल बहादुर शास्त्री के नवासे सिद्धार्थ नाथ सिंह जैसों को तो पार्टी ने उम्मीदवार बनाया ही है इतेहा यह कि कम्युनिस्ट से महज ढाई साल कब्ल बीजेपी बने लखनऊ जिले के मोहनलाल गंज से जीत कर लोक सभा तक का सफर तय करने वाले कौशल किशोर की बीवी जयदेवी तक को मलिहाबाद असम्बली हलके से टिकट दे दिया गया जिले के मोहनलाल गंज हलके से हमेशा हिन्दुत्व और भगवानों को बुरा-भला कहने वाले आर के चैधरी को टिकट दिया गया है। साबिक वजीर-ए-आला कल्याण सिंह अब खुद तो राजस्थान के गवर्नर हैं बेटा राजवीर लोक सभा मेम्बर है अब उनकी बहु और पोते को भी असम्बली उम्मीदवार बना दिया गया है। लालजी टण्डन के बेटे आशुतोष टण्डन को लखनऊ पूर्व से टिकट दिया गया। कांग्रेस से समाजवादी होते हुए बीजेपी में पहुचे साबिक मेम्बर असम्बली चन्द्रशेखर त्रिवेदी के बेटे अविनाश त्रिवेदी को बख्शी का तालाब से टिकट दिया गया है। हुकुम सिंह की बेटी मृगांका को कैराना, बृजभूषण शरण सिंह एमपी के बेटे प्रतीक भूषण सिंह को गोण्डा सदर से, सर्वेश सिंह एमपी के बेटे सुशांत सिंह को बुढाना से, स्वामी प्रसाद मौर्या को पडरौना तो उनके बेटे उत्कृष्ट मौर्या को ऊंचाहार से, संजय सिंह की पहली बीवी गरिमा सिंह को अमेठी से, ब्रहमदत्त द्विवेदी के बेेटे सुनील दत्त द्विवेदी प्रेमलता कटियार की बेटी नीलिमा कटियार को कल्याणपुर से तो शेर बहादुर सिंह के बेेटे को भी टिकट दिए गए हैं। इन टिकटों पर उठे सवालात का जवाब देते हुए पार्टी के तर्जुमान संबित पात्रा ने एक नई तशरीह (परिभाषा) गढ दी उन्होने कहा कि अगर किसी लीडर का बेटा या बेटी मेहनत करके ऊपर आए हैं और उन्हंे टिकट दे दिया गया तो इसे कुन्बापरस्ती नहीं कहा जा सकता। हां अगर उन्हंे टिकट न दिया जाता तो बड़ी नाइंसाफी होती।

वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी के लोक सभा हलके बनारस में सात बार से जीत कर असम्बली पहुचने वाले श्यामदेव राम चैधरी का टिकट काट दिया गया। वह बहुत नाराज हैं कहते हैं कि उन्ही की उम्र के सत्यप्रकाश अग्रवाल को मेरठ से और उनसे तीन साल बड़े गंगा सिंह कुशवाहा को कुशीनगर से टिकट दे दिया गया। बनारस से मेम्बर असम्बली रहे हरीश और ज्योत्सना श्रीवास्तव के बेटे सौरभ श्रीवास्तव को टिकट दिया गया, उदयभान करवरिया की बीवी नीलम करवरिया को मेजा, कमलेश पासवान के भाई विमलेश पासवान को बांसगांव से, रवीन्द्र कुशवाहा के भाई जयनाथ कुशवाहा को भटपर रानी से रमाकांत यादव के बेटे अरूण यादव को फूलपुर से, बाबूराम बलवंत की बेटी संगीता बलवंत को गाजीपुरसे और प्रदेश बीजेपी के साबिक सदर ओमप्रकाश सिंह के बेटे अनुराग सिंह को चुनार से टिकट दिया गया है।

बीजेपी के उम्मीदवारों के एलान के बाद पार्टी के पुराने लोगों ने जिले-जिले मंे तो हंगामा और मजाहिरा किया ही, पच्चीस जनवरी को हजारों लोगों ने लखनऊ मंे बीजेपी के रियासती सदर दफ्तर पर जबरदस्त हंगामा किया। सभी का कहना था कि बीजेपी के वफादारों को नजरअंदाज करके दूसरी पार्टियों से चंद दिन पहले ही आए दलबदलुओं को टिकट देकर पार्टी ने अपने लोगों की तौहीन की है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में अपना दल, (बाकी पेज दो पर) सुहेलदेव के नाम पर बनी राजभर बिरादरी की पार्टी के लिए ही 27 सीटें छोड़ दी गई। यह बात भी बीजेपी कारकुनों और लीडरों को पसंद नहीं आई। लखनऊ के मोहनलाल गंज हलके से बीजेपी ने बीएसपी के पुराने लीडर आर के चैधरी को टिकट दिया है, लेकिन आर के चैधरी ने पच्चीस जनवरी को यह कहकर आजाद उम्मीदवार की हैसियत से पर्चा नामजदगी दाखिल किया कि वह बीजेपी के चुनाव निशान पर एलक्शन लड़ने के बजाए अपनी पसंद के निशान पर एलक्शन लड़ेंगे। आर के चैधरी की इस कार्रवाई से बीजेपी के लीडरान सकते में तो मकामी वर्कर जबरदस्त गुस्से में दिखे। पार्टी के रियासती दफ्तर पर इकट्ठा होकर हजारों वर्करों ने रियासती सदर केशव मौर्य से मुतालबा किया कि चैधरी के बजाए मोहनलाल गंज से पार्टी के किसी पुराने और वफादार लीडर को टिकट दिया जाए लेकिन केशव मौर्य ने साफ कह दिया कि आर के चैधरी चाहे किसी चुनाव निशान से लड़ें बीजेपी को उनकी मदद करनी है इसलिए उनके खिलाफ कोई उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा जाएगा। इसपर बीजेपी वर्करों का जवाब था कि फिर हम मोहनलाल गंज में आर के चैधरी को तो हराएंगे ही, इर्दगिर्द की चार-छः सीटों पर लड़ रहे बीजेपी उम्मीदवारों को भी जीतने नहीं दिया जाएगा।

अखिलेश यादव ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की जानिब से तेजी से अपनी चुनावी मुहिम छेड़ रखी है। वह नोटबंदी के सवाल पर बीजेपी और वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी पर सख्त हमले करते हैं। बजाहिर लोगों को उनकी तकरीरों में दिलचस्पी दिखने लगी है। लेकिन अखिलेश यादव के हाव-भाव से जो गुरूर झलकता है उससे  उनकी पार्टीको किसी हद तक नुक्सान पहुचने का भी अंदेशा है। अपनी पब्लिक मीटिंगों में वह नोटबंदी के बाद आम लोगों को होने वाली दुश्वारियों का असरदार तरीके से जिक्र करते हुए यह सवाल भी करते हैं कि अच्छे दिनों का वादा करके तकरीबन ढाई साल पहले नरेन्द्र मोदी ने लोक सभा एलक्शन में आप लोगों के वोट ले लिए थे लेकिन क्या अच्छे दिन आए? फिर खुद ही जवाब भी देते हैं कि अच्छे दिन तो किसी को नहीं दिख रहे हैं। मैं प्रदेश का वजीर-ए-आला हूं मुझे भी अभी तक अच्छे  दिन नहीं दिखे लेकिन नोटबंदी के बाद सबके लिए जो सख्त बुरे दिन आए वह सभी को दिख रहे हैं।

कांग्रेस और अखिलेश की समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश में अपने अच्छे लड़के (राहुल और अखिलेश) बनाम बाहरी (नरेन्द्र मोदी) के नारे के साथ इतखाबी मुहिम छेड़ी है। दोनों की मुश्तरका मुहिम मेें मुलायम सिंह यादव, सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी,राज बब्बर, गुलाम नबी आजाद और अखिलेश की लोक सभा मेम्बर बीवी डिम्पल यादव के अलावा जया बच्चन व नगमा समेत फिल्म इंडस्ट्री के भी कई अदाकारों के शामिल होने की बात कही गई है। इन सभी का सारा फोकस नोटबंदी और मोदी के जरिए 2014 मंे किए गए लम्बे चैडे़ वादों और झूटे बयानात पर ही रहेगा। बीजेपी में बौखलाहट का आलम यह हो गया है कि पार्टी के फायरब्राण्ड कहे जाने वाले विनय कटियार ने प्रियंका गांधी के खिलाफ इंतेहाई तौहीनआमेज और काबिले एतराज बयानबाजी करते हुए कह दिया कि अगर कांग्रेस यह सोचकर प्रियंका को मैदान मंे उतार रही है कि वह देखने में खूबसूरत और दिलकश हैं तो कांगे्रस को यह नहीं भूलना चाहिए कि अव्वल तो खूबसूरती देखकर कोई वोट नहीं देता, दूसरे अगर यही पैमाना होगा तो हमारी तरफ भी स्मृति ईरानी और हेमा मालिनी समेत खूबसूरत ख्वातीन की एक लम्बी चैड़ी टीम है। उनके इस बयान के बाद कांगे्रस समेत तमाम पार्टियों ने उनके और बीजेपी के खिलाफ सख्त बयान दिए। हद यह कि बीजेपी ने भी कटियार के बयान से अपना दामन बचा लिया।

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