समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर एलक्शन लड़ने से कांग्रेस को कोई खास फायदा नहीं मिलेगा – अखिलेश कांग्रेस गठजोड़ फायदे में बीजेपी

समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर एलक्शन लड़ने से कांग्रेस को कोई खास फायदा नहीं मिलेगा – अखिलेश कांग्रेस गठजोड़ फायदे में बीजेपी

”कांग्रेस ने अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी के साथ गठजोड़ करके मुस्लिम वोट तकसीम होने की राह हमवार कर दी। इसका सीधा फायदा बीजेपी को ही मिलेगा। बीजेपी और आरएसएस हामी मीडिया ने यह प्रोपगण्डा भी शुरू कर दिया कि मुस्लिम वोट पूरी तरह एक जुट हो रहा है। नतीजा यह कि बीजेपी को जवाब में हिन्दू वोट पोलराइज करने का मौका मिल गया। मुस्लिम इत्तेहाद का प्रोपगण्डा जितना होगा हिन्दू वोट भी उतना ही पोलराइज होगा।“

 

”खबर यह भी है कि अमित शाह के इशारे पर ही रामगोपाल यादव ने कांग्रेस के साथ गठजोड़ करने का दबाव अखिलेश पर डाला। हालात भी इसकी गवाही देते हैं क्योंकि मुलायम कुन्बे में अंदरूनी झगड़ा शुरू होते ही रामगोपाल पूरी शिद्दत के साथ अखिलेश की हिमायत में खड़े हुए तभी से अखिलेश ने बयान देना शुरू किया कि अगर कांग्रेस के साथ गठजोड़ हो जाए तो वह तीन सौ से ज्यादा सीटें जीत लेंगे।“

 

”मुलायम कुन्बे में टकराव और अखिलेश सरकार के खिलाफ इनकम्बेन्सी के पेशेनजर मायावती को पूरा भरोसा था कि इस बार मुस्लिम वोेट एक मुश्त बहुजन समाज पार्टी को ही मिलेंगे उन्होने 97 मुस्लिम उम्मीदवार भी उतार दिए। अब कांग्रेस के साथ अखिलेश के गठजोड़ के बाद शायद मायावती का भरोसा कायम न रह सके। मुस्लिम वोट तकसीम हो और बीजेपी को फायदा मिले। पच्छिमी उत्तर प्रदेश में मुसलमान अभी भी मायावती की तरफ ही हैं।“

 

 

लखनऊ! तकरीबन छः महीने से गांव-गांव तक के पार्टी वर्कर्स को घरों से निकालकर पार्टी के लिए सरगर्म करने के बाद कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश असम्बली की 403 में से महज 105 सीटें लेकर अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी के साथ गठजोड़ करके अपना कम भारतीय जनता पार्टी को ज्यादा फायदा उठाने का मौका फराहम करा दिया है। इस गठजोड़ के जरिए अखिलेश यादव ने एक बार फिर मुस्लिम वोटों का फायदा उठाने का मौका तलाश लिया है। क्योंकि 2014 के लोक सभा एलक्शन के वक्त से ही प्रदेश और देश के आम मुसलमानों का रूझान कांग्रेस की तरफ बढा है। मुलायम सिंह यादव को पार्टी में अलग थलग किए जाने के बाद प्रदेश के मुसलमानों में अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी उतनी मकबूल नहीं रह गई थी जितनी मुलायम के जमाने में थी। अखिलेश को भी इसका पूरा एहसास है इसी लिए मुसलमान वोटर्स को अपनी तरफ लाने के लिए अखिलेश यादव ने कांग्रेस के साथ इंतखाबी गठजोड़ किया है। अब प्रदेश के मुस्लिम वोटों की तकसीम (बंटवारा) मायावती की बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस अखिलेश गठजोड़ के दरम्यान होना यकीनी हो गया है। इसका सीद्दा फायदा भारतीय जनता पार्टी को मिलने की उम्मीदों में इजाफा हो गया है। दूसरी बात यह कि अखिलेश-कांग्रेस गठजोड़ होने के बाद से ही भारतीय जनता पार्टी हामी मीडिया ने मुसलमानों के एकजुट होने का हव्वा खड़ा करना शुरू कर दिया है। यह काम एक सोची समझी हिकमते अमली (रणनीति) के तहत किया जा रहा है। क्योंकि मुसलमानों के मुत्तहिद होने की खबरें या अफवाहें जितनी फैलेंगी दूसरी तरफ जवाब में हिन्दू वोटर्स का पोलराइजेशन भी उतनी तेजी से ही होगा। खबरें तो यहां तक हैं कि बीजेपी सदर अमित शाह के इशारे पर रामगोपाल यादव ने अखिलेश पर दबाव डालकर कांग्रेस से इंतखाबी गठजोड़ कराया है। रामगोपाल यादव को करीब से जानने वाले यह बात भी अच्छी तरह जानते हैं कि रामगोपाल जेहनी तौर पर मुस्लिम मुखालिफ हैं। पांच साल की हुकूमत के दौरान उन्होने अखिलेश यादव को भी मुलायम जैसा मुस्लिम हमदर्द नहीं बनने दिया। अखिलेश यादव ने पांच साल की सरकार के दौरान हर कदम पर जाहिर भी किया है कि मुस्लिम मफाद (हित) उनकी तरजीहात (प्राथमिकताओं) मेें शामिल नहीं हैं। यह कहना भी गलत नहीं होगा कि अगर किसी तरह भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश में जीतती है तो उसकी वजह कांग्रेस के साथ अखिलेश का गठजोड़ ही होगा।

इस हकीकत को भी नहीं भूलना चाहिए कि कांग्र्रेस और समाजवादी पार्टी के इस गठजोड़ में अजित सिंह की राष्ट्रीय लोकदल को शामिल नहीं किया गया है इसलिए अब इस गठजोड़ का मकसद हल नहीं होगा पच्छिम की पचास से ज्यादा असम्बली सीटों पर जाट आबादी है और जाटों में अजित सिंह व उनके राष्ट्रीय लोक दल का असर खत्म नहीं हुआ है। खबर लिखे जाने तक समाजवादी पार्टी की जानिब से दोनों ही लीडरान यानी अखिलेश यादव और रामगोपाल यादव ने इसपर कोई बात नहीं की लेकिन अजित सिंह की पार्टी ने इस गठजोड़ में शामिल न होने का एलान कर दिया। अब जाट वोट एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी की तरफ चला जाएगा। हालांकि जाटों में भारतीय जनता पार्टी के लिए आजकल काफी नाराजगी पैदा हो चुकी है। लेकिन अजित सिंह के अकेले रह जाने की सूरत में जाट बिरादरी राष्ट्रीय लोकदल के हक में वोट करेगी इस पर शक है क्योंकि अकेली बिरादरी के एक तरफ रहने से उनके वोट खराब होने का ही खतरा रहेगा। उद्दर पहले से ही गुरूर मे डूबे अखिलेश यादव और रामगोपाल यादव का रवैया अब कुछ ऐसा हो गया है जैसे उन्होने मुलायम सिंह यादव और शिवपाल यादव से पार्टी छीनने की लड़ाई जीत कर प्रदेश की तमाम सियासी पार्टियों को ही जीत लिया है। यह अखिलेश और रामगोपाल का गुरूर ही है कि पहले मरहले के एलक्शन के लिए उम्मीदवारों के पर्चे नामजदगी दाखिल किए जाने की आखिरी तारीख सर पर आ जाने के वक्त तक यह दोनों आरएलडी के सदर अजित सिंह या उनके बेटे जयंत चौद्दरी से मिलकर बात करने के लिए तैयार नहीं हुए। दूसरों के जरिए उन्हें मैसेज भेजवाया गया था कि अगर वह गठजोड़ में शामिल होतो उन्हें बीस से ज्यादा सीटें नहीं दी जा सकती। जबकि अजित सिंह तीस सीटें लेना चाहते थे। बीस सीटें भी अखिलेश ग्रुप ने कांग्रेस की सीटों में से देने की बात कही थी। अजित सिंह का इस गठजोड़ मे शामिल न होने का एक असर यह पड़ेगा कि फिर पच्छिमी उत्तर प्रदेश के मुसलमानों का एक मुश्त वोट मायावती की बहुजन समाज पार्टी को चला जाएगा।

समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठजोड़ में शामिल न किए जाने से नाराज राष्ट्रीय लोकदल ने समाजवादी पार्टी उसके लीडर अखिलेश यादव और रामगोपाल यादव को बीजेपी से मिला हुआ करार दिया। पार्टी के जनरल सेक्रेटरी त्रिलोक त्यागी ने समाजवादी पार्टी  की लीडरशिप पर सख्त हमले करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस के इशारे पर यह लोग काम करते हैं। बिहार में जब बीजेपी के खिलाफ महागठबंद्दन बना था तो मुलायम सिंह और रामगोपाल यादव ने ही उसे तोड़ने का काम किया था। त्रिलोक त्यागी ने कहा कि हम अखिलेश यादव के घर नही गए थे कि वह हमारे साथ गठजोड़ कर लें पहले शिवपाल यादव खुद हमारे घर आए थे फिर मुलायम सिंह यादव ने चौद्दरी अजित सिंह से बात की उसके बाद खुद अखिलेश यादव ने कई बार बात की लेकिन अब अचानक वह सातवें आसमान पर पहुच गए हैं। वह इतने गुरूर में डूबे हुए हैं कि कुछ सुनने को तैयार नहीं हैं। उन्होने कहा कि सियासत गुरूर (र्घमण्ड) के साथ्ा नहीं चलती। जब कोई गठजोड़ बनता है तो गठजोड़ में शामिल होेने वाली सभी पार्टियों को थोड़ा-थोड़ा दबना भी पड़ता है। उन्होने कहा कि अब हम पूरे उत्तरप्रदेश मेें अपने उम्मीदवार खड़ेे करेंगे।

जो लोेग यह ख्याल जाहिर कर रहे हैं कि अमित शाह के इशारे पर ही रामगोपाल यादव ने कांग्रेस के साथ गठजोड़ करने के लिए अखिलेश यादव पर दबाव डाला है उनकी बात ठीक भी लगती है। क्योंकि जबसे मुलायम कुन्बे में आपसी टकराव शुरू हुआ और रामगोपाल पूरी शिद्दत से अखिलेश यादव के साथ खड़े हुए उसी के बाद अखिलेश यादव ने बयान देना शुरू कर दिया कि अगर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी मिलकर एलक्शन लड़े तो हम प्रदेश की 300 से भी ज्यादा सीटें जीत लेंगे। जैसे-जैसे अखिलेश और मुलायम व शिवपाल के दरम्यान टकराव में इजाफा होता गया वैसे-वैसे कांग्रेेस के साथ गठजोड़ की अखिलेश यादव की कोशिशों में इजाफा होता गया। कांग्रेस की जानिब से कोई बयान नहीं आया इसके बावजूद अखिलेश बार-बार कहते रहे कि अगर समाजवादी पार्टी और कंाग्रेस का गठजोड़ हो जाए तो हम 300 से ज्यादा सीटें जीत लेंगे। उद्दर दिल्ली में रामगोपाल यादव अखिलेश यादव के बयानात को परवान चढाने के लिए खामोशी के साथ कांग्रेस लीडरान से बातचीत करते रहे आखिर अखिलेश और रामगोपाल दोनों मिलकर कांग्रेस पार्टी को शीशें में उतारने में कामयाब हो ही गए।

कांग्रेस नायब सदर राहुल गांद्दी ने पहले तो उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की हालत ठीक करने का काम नरेन्द्र मोदी के खास रहे प्रशांत किशोर को सौंप दिया जो पीके के नाम से जाने जाते हैं। फिर खुद राहुल ने पूरे उत्तर प्रदेश का दौरा करने और जिलों में खाट सभाएं व रोडशो करने का फैसला किया नारा दिया गया ‘27 साल यूपी बेहाल’ प्रदेश के गांव-गांव मे अपने घरों में खामोश पड़े कांग्रेसियों ने राहुल गांद्दी और पार्टी के प्रोग्रामों को हाथों-हाथ लिया खाट सभाएं हो जिला सतह की मीटिंगे हो, रोडशो हो या राहुल संदेश यात्राएं आम कांग्रेसियों ने घरों से निकल कर अपनी ताकत का भरपूर मुजाहिरा किया। जितने भी प्रोग्राम हुए किसी भी प्रोग्राम के लिए पार्टी ने जिलों को कोई पैसा भी नहीं दिया। कांग्रेस से असम्बली का टिकट चाहने वालों और वर्कर्स ने अपनी-अपनी सकत के मुताबिक हजार से दस बीस लाख रूपए तक खर्च किए अब कांग्रेस ने एक चौथाई सीटों के लिए अखिलेश की समाजवादी पार्टी से गठजोड़ करके 75 फीसद कांग्रेसियों को मायूसी के अंद्देरे में ढकेल दिया। राहुल गांद्दी और कांग्रेस पार्टी का अस्ल निशाना 2019 का लोक सभा एलक्शन है असम्बली एलक्शन के डेढ साल बाद से ही उसके लिए मैदान में उतरना पड़ेगा। तब कौन वर्कर पार्टी के लिए खड़ा होगा? यह बात गठजोड़ करते वक्त किसी ने नहीं सोची। अब गठजोड़ हो गया है कांग्रेस को यह इल्जाम अपने सर लेने के लिए तैयार रहना चाहिए कि समाजवादी पार्टी के साथ गठजोड़ करके कांग्रेस ने मुस्लिम वोटों की तकसीम कराई और बीजेपी के लिए रास्ता साफ कर दिया।

 

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