नोट बंदी से आम आदमी का बुरा हाल

नोट बंदी से आम आदमी का बुरा हाल

बैंको में कैश न होने, बैंक मुलाजिमीन की बदतमीजियो, अवाम की जल्दबाजी के सबब कई मकामात पर झगड़े के वाक्यात पेश आ रहे हैं। वजीर ए आजम और फाइनेंस मिनिस्टर की बयानबाजियो के बावजूद कम नहीं हो रही हैं अवाम की मुश्किले, एटीएम खाली डिब्बे बन गए हैं। दस दिन से ज्यादा गुजर जाने के बावजूद हालत सुधर नहीं रहे हैं। अवाम की परेशानियो के साथ मोदी सरकार के खिलाफ उनके गुस्से में इजाफा हो रहा हैं सामान लाने ले जाने वाले ट्रको के पहिए रुके तो बढ़ेगी मंहगाई, कफन और अंतिम संस्कार के लिए भी पैसा नहीं हैं।

 

लखनऊ! वजीर ए आजम नरेन्द्र मोदी के जरिए अचानक 500 और हजार के नोट बंद करने से मुल्क में इमरजेंसी जैसे हालात पैदा हो गए हैं। दावा तो यह किया जा रहा है कि बेईमानों, काला धन रखने वालों के खिलाफ मुल्क के मफाद में यह कार्रवाई की गयी है लेकिन नोट बंदी के फैसले ने आम आदमी का जीना दूभर कर दिया है। लोग नोट बदलने और लेने के लिए बैंको की लम्बी-लम्बी लाइनो में लगे हैं; जिसकी वजह से मुल्क भर में ढ़ाई दर्जन से ज्यादा लोगो की मौत हो चुकी हैं। इन मौतो का जिम्मेदार किसे ठहराया जाए? कई लोगो की शादिया टूट गई या बदइंतजामी की नज्र हो गई। नोट बंद करने के बाद उसका कोई मुतबादिल (वैकल्पिक) बंदोबस्त  न होने से अफरा तफरी मची हुई हैं। कई मकामात पर बैंको की बदइंतजामी और अवाम की जल्दबाजी की वजह से झगड़ांे की मुसलसल खबरे आ रही हैं। वजीर ए आजम मोदी, फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली और उर्जित पटेल बयानबाजी करके अवाम को गुमराह कर रहे हैं। जमीनी हकीकत यह हैं कि सरकारी और कुछ प्राइवेेट बैंको से सरकार के जरिए एलान कर्दा 24000 रुपए अवाम को नहीं दिए जा रहे हैं और कैश कम होने का बहाना बनाया जा रहा हैं। देही इलाको के पच्चान्नवे फीसद और शहरो में साठ फीसद एटीएम डिब्बा बने हुए हैं। जहा कैश हैं वहां लम्बी-लम्बी लाइने लगी हुई हैं। मुल्क की सड़को पर दौड़ने वाले दस लाख ट्रको में से 90 फीसद खड़े होने की कगार पर हैं क्योकि पुराने नोट उनसे कोई ले नहीं रहा हैं और नए नोट उनके पास हैं नहीं, ऐसे उनके पास ट्रक खड़े करने के अलावा कोई और रास्ता नहीं हैं। अगर ट्रको के पहिए रुक गए तो मुल्क में खाने-पीने की चीजो की भी किल्लत हो जाएगी और फिर नमक खत्म होने की अफवाह फैलाकर भक्त नुमा ताजिर माहौल खराब  कर सकते हैं। कुल मिलाकर इस वक्त मुल्क में गैर एलानिया (अघोशित) इमरजेंसी  जैसे हालात हैं। लोग घर से निकलने और पैसा खर्च करते घबरा रहे हैं। लखनऊ में 800 एटीएम हैं जिनमें ज्यादातर  खाली हैं।

आठ नवम्बर को अचानक 500 और हजार रुपए के नोट बंद करने का एलान करते वक्त वजीर ए आजम ने लोगो से दो-चार रोज की तकलीफ उठाने की बात कही थी। उनकी तमाम बातो की तरह अवाम ने इस पर भी यकीन कर लिया, कि हफ्ते भर में हालात ठीक हो जाएगे। लेकिन अब एलान को दस दिन से ज्यादा का अर्सा गुजर चुका हैं हालात ठीक होने के बजाए खराब ही होते जा रहे हैं। इन दस दिनो में तकरीबन तीन दर्जन लोगो की मौत की खबरे भी आई जो नोट बंद होने के बाद मायूसी मंे या लाइन में लग कर मौत के मुंह में पहुंच गए। इन मौतो का जिम्मेदार कौन हैं। इसका जवाब देने के लिए नरेन्द्र मोदी या उनके भक्त तैयार नहीं हैं। नोट बंद होने के बाद उसका कोई मुतबादिल बंदोबस्त नहीं होने से लोगो को जबरदस्त परेशानी का सामना करना पड़ रहा हैं। बैंको में जरुरत के मुताबिक नोट न मिलने की वजह से उन्हे लोगो के गुस्से का सामना करना पड़ रहा हैं। साथ ही कई जगहो पर बैंक मुलाजिमीन भी अवाम से बदतमीजी करते नजर आते हैं जिसकी वजह से कई मकामात पर झगड़े के वाक्यात पेश आए हैं।

उत्तर-प्रदेश के वजीर ए आला अखिलेश यादव का यह इल्जाम सच नजर आता हैं कि अवाम की परेशानियो को ध्यान में रखे बगैर जल्दबाजी में नोट बंदी का फैसला लिया गया हैं। यही वजह हैं कि दस दिन से ज्यादा का वक्त गुजर जाने के बावजूद बैंको की लाइने कम होने का नाम नहीं ले रही हैं और झगड़ा अलग हो रहा हैं। उत्तर-प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 800 एटीएम हैं जिनमें 700 खाली पड़े हैं। इसके अलावा लोगो को बैंक से और कभी-कभी एटीएम से भी कटे-फटे नोट मिल रहे हैं। इस बारे में लखनऊ के कुछ बैंक अफसरान का कहना हैं कि यह ऐसे नोट हैं जिन्हे ”नान-इश्यूएबल“ करार देकर बैंको ने आर बी आई को उन्हे जलाने (नष्ट करने) के लिए भेजा था। आर बी आई वही नोट वापस भेज रही हैं जिसकी वजह से अवाम को परेशानी हो रही हैं और वह झगड़ा कर रहे हैं। कई बैंको के मुलाजिमीन अपने जान-पहचान के लोगो को बगैर लाइन लगवाए अंदर ले जाते हैं जिसकी वजह से लाइन लाइन में लगे लोगों से झगड़ा हो रहा है, कई जगहों पर पुलिस वाले लोगों से पैसा लेकर बगैर लाईन के अंदर भेज रहे हैं और अगर कोई एतराज करे तो उसकी पिटाई भी कर देते हैं। छत्तीसगढ़  के रामपुर में झगड़ा बढ़ने पर बैंक के गार्ड ने लाइन में लगे लोगो पर बंदूक तान दी थी। अपने ही पैसे के लिए बैंको की लाइनो में धक्के और गालिया खा रहे लोग हर लम्हे नरेन्द्र मोदी को कोस रहे हैं और हर एलक्शन में बीजेपी को मिटाने की बाते कह रहे हैं।

नोट बंदी की सबसे ज्यादा मार उन लोगो पर पड़ी हैं जिनके पास पुराने नोट थे और घर में लाश पड़ी थी। गोरखपुर के सोनौर खुर्द गांव के मरोस साहनी की 70 साल की बीवी कैलाशी देवी की मौत हो गई करमेनी घाट पर उनका अंतिम संस्कार होना था लेकिन दुकानदार ने नए नोट न होने की वजह से उसे कफन देने से इंकार कर दिया। जब लोगो ने छोटे नोट इकट्ठा करके दिए तो उसे कफन नसीब हुआ। बरेली में एक साबिक बैंक मैनेजर की मौत हो गई तो उसके अंतिम संस्कार में छोटे नोट न होने की वजह से देर से हुई। मेरठ में लाल कुर्ती के हंडिया  की रहने वाली 70 साल की एक बेवा की अर्थी पुराने नोटो की वजह से नहीं उठ पा रही थी तो मोहल्ले वालो ने चंदा करके उसकी अर्थी उठवाई। अब यह भी अजीब सितम हैं कि घर में पैसे होते हुए भी चंदे से उसकी अर्थी उठाई गई। ऐसे वाक्यात से मोदी के खिलाफ अवाम में नाराजगी बढ़ रही हैं।

बैंक की लाइन में 71 साल की चांदना सुबह से खड़ी थी। उन्होने कहा कि दस हजार की जगह बैंक के लोगो ने उन्हे दो हजार रुपए देकर ही टरखा दिया। पूरे दिन के बाद 2000 रुपए मिले हैं। 67 साल की शकुंतला भी बैंक की लाइन में सुबह से खड़ी थीं। उन्होंने कहा कि पेंशन बैंक में आती हैं इसलिए यहा आई हैं। घर में दवा के भी पैसे नहीं हैं। 65 बरस की रंजना देवी कहती हैं कि घर में शादी हैं लेकिन बीस के बजाए दस हजार बैंक से मिले हैं। कुछ इसी किस्म की दिक्कत 68 साल की रसूला बेगम की हैं। वह बीमार बेटे का इलाज कराने और दवा के लिए पैसे लेने बैंक गई थी मगर उन्हे भी सिर्फ दो हजार रुपए दिए गए। 64 बरस की रफीकुन सुबह आठ बजे से लाइन में खड़ी थी शाम को चार बजे उनका नम्बर आया तो उनकी मर्जी मुताबिक पैसा नहीं मिला। 70 साल की किस्मतुन के कोई औलाद नहीं हैं, वह सिर्फ 500 रुपए का नोट बदलवाने के लिए सुबह से लाइन में खड़ी हैं। मगर उनका 500 रुपए का नोट कोई बदलने के लिए तैयार नहीं हैं।

नोट बंदी का सबसे बुरा असर माल ढ़ोने वाले ट्रको पर पड़ रहा हैं। उनके पास जो पैसा हैं उससे उनका खाना पीना तो दूर पुलिस वाले रिश्वत के तौर पर भी नहीं ले रहे हैं। एक अंदाजे के मुताबिक दस लाख से ज्यादा ट्रक मुल्क की सड़को पर दौड़ते हैं उनमें नब्बे फीसद के खड़े होने की नौबत आ गई हैं। ट्रक आपरेटर एंड ट्रांस्पोर्ट एसोसिएशन के सदर अरुण अवस्थी कहते हैं कि पहले हजार ट्रक रोज शहर में आते जाते थे अब सौ भी नहीं आ रहे हैं। इमरजेंसी जैसा मोहौल हैं। इनके अलावा तमाम व्यापारी रो रहे हैं उनका कहना हैं कि अचानक नोट बंद होने से दस करोड़ रुपए रोज का नुक्सान हो रहा हैं। ट्रको के जरिए जब माल ही शहरो में नहीं आएगा तो मंहगाई में इजाफा होने लगेगा। खबर लिखे जाने तक दाल की कीमतो में दो रुपए किलो और रिफाइंड आयल में 4 से 5 रुपए का इजाफा हो चुका था। (बाकी पेज चैदह पर) दरअस्ल उत्तर-प्रदेश में तेल, मसाले और दाले, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र और केरल से आती हैं। नए नोट बाजार में आ नहीं रहे हैं और पुराने नोट चल नहीं रहे हैं। इस वजह से लोगो में बेचैनी पाई जा रही हैं लोग जमाखोरी करने लगे हैं और बाजार मंे सामान की मसनूई किल्लत करने की कोशिश हो रही हैं।

वजीर ए आजम के नोट बंदी के फैसले से सबसे ज्यादा परेशान गरीब आदमी हैं और मोदी कह रहे हैं कि गरीब आदमी चैन से सो रहा हैं। दिल्ली के वजीर ए आला अरविंद केजरीवाल ने ठीक कहा कि गरीब आदमी चैन से सो नहीं रहा हैं बल्कि बैंक की लाइन में खड़ा हो रहा हैं। अभी तक मुल्क भर में कही भी कोई आला सरकारी अफसर या सियासतदां पैसा निकालने के लिए बैंक की लाइन में खड़ा नजर नहीं आया हैं। इससे साफ हैं कि नरेन्द्र मोदी अपनी आदत के मुताबिक अवाम को गुमराह कर रहे हैं। जिस गरीब आदमी केे पास हजार-दो हजार रुपए भी रखे हुए थे कि मुसीबत में काम आएंगे वह इस खौफ में लाइन में खड़ा हैं कि न जाने अब उसकी मेहनत की कमाई काला धन बन जाए।  लोग अपने दफ्तर और औरते अपना घर छोड़कर भूकी प्यासी लाइन में लगी हैं। इस दौरान एक अच्छी बात यह हुई हैं कि अवाम की परेशानी को देखते हुए कुछ लोगो ने लाइन में भूके प्यासे लोगो को चाय, पानी और कोल्ड ड्रिंक तक पिला कर समाजी खिदमत और इंसानी जज्बे का सुबूत दिया हैं। इस नोट बंदी को भक्त नुमा लोग भले ही अच्छा मान रहे हैं लेकिन जिस तरह से अवाम के दिलो में मोदी और उनकी सरकार के लिए गुस्सा बढ़ रहा हैं, उससे लग रहा हैं कि अब बीजेपी के बुरे दिन आने वाले हैं।

फोटो- लाइन में लगे औरतो और मर्दो की, यूपी के कुछ हंगामे लाठी चार्ज की हो तो वह भी लगा देना