भारत इस बार लंदन ओलम्पिक क मुकाबले तकरीबन दो गुने मैडल जीत सकता है

भारत इस बार लंदन ओलम्पिक क मुकाबले तकरीबन दो गुने मैडल जीत सकता है

भारत लंदन ओलम्पिक मंे भले ही गोल्ड मैडल नहीं जीत सका था लेकिन उसने अपनी ओलम्पिक मुहिम में सबसे ज्यादा मैडल दो सिल्वर और चार ब्रांज जीते थे। इस मुजाहिरे के बाद माना जाने लगा था कि हिन्दुस्तानी खिलाड़ी भी अब आलमी सतह पर पहंुच गए हैं। 2016 ओलम्पिक साल है क्योंकि इस साल अगस्त महीने में ब्राजील के रियो डि जेनेरियो में 31वें ओलम्पिक खेलों का इनअकाद होना है। हिन्दुस्तानी खिलाड़ी भी जोरशोर से इसकी तैयारियों में लगे हुए हैं और कहा जा रहा है कि भारत इस बार लंदन ओलम्पिक के मुकाबले तकरीबन दो गुना मैडल जीत सकता है जिसमें कुछ गोल्ड भी हो सकते हैं। भारत को सबसे ज्यादा मैडल पाने की उम्मीदा निशानेबाजी, कुश्ती, मुक्केबाजी, टेनिस अैर तीरंदाजी में है। इन सबसे ऊपर हिन्दुस्तानी हाकी टीम से 1980 के मास्को ओलम्पिक के बाद मैडल जीतने की उम्मीद की जा रही है।
पिछले दिनों रायपुर में हुई वल्र्ड हाकी लीग फाइनल्स मे वह कांसे का मैडल जीत सकी। रियो ओलम्पिक से पहले इस मैडल को टीम का हौसला बढाने वाला माना जा रहा है।
यह सही है कि 2015 मे कोच पालवान ऐस को हाकी इंडिया से तनाजों के सबब जाना पड़ा और यह हिन्दुस्तानी हाकी के लिए जोरदार झटका था। लेकिन हाई परफारमेंस कोच रोलैंट ओल्टमंेस की मौजूदगी ने हालात बिगड़ने से बचा लिया और सरदार सिंह की अगुवाई वाली हिन्दुस्तानी टीम आज इस मकाम पर पहुंच गई है कि उससे मैडल जीतने तक की उम्म्मीद की जाने लगी है।
वहीं हिन्दुस्तानी खातून हाकी टीम ने तो तकरीबन तीन दहाई के बाद ओलम्पिक में खेलने का मौका हासिल किया है। खातून हाकी टीम का ओलम्पिक में खेलना ही बड़ी कामयाबी है। हिन्दुस्तानी निशानेबाजों ने सही मायनो में आलमी सतह हासिल की है। कई हिन्दुस्तानी निशानेबाज दुनिया में नम्बर वन रैकिंग पर रहे हैं। 2004 मंे राज्यवर्धन सिंह ने एथेंस में सिल्वर मैडल जीता,2008 में पेइचिंग ओलम्पिक में अभिनव बिंद्रा ने गोल्ड मैडल जीता और वह जाती तौर पर गोल्ड मैडल जीतने वाले पहले हिन्दुस्तानी बने। वहीं लंदन ओलम्पिक में विजय कुमार ने रजत और गगन नारंग ने कांसे का मैडल जीता। हिन्दुस्तानी निशानेबाजों में अब तक 2008 पेइचिंग ओलम्पिक के गोल्ड मैडल जीतने वाले अभिनव बिंद्रा (10 मी0एयर राइफल) की अगुवाई में जीतू राय (50 मी. पिस्टल), लंदन ओलम्पिक के कांसे का मैडल जीतने वाले गगन नारंग (50 मी. राइफल प्रोन), गुरप्रीत सिंह (10 मी.राइफल थ्री पोजीशन), मेराज अहमद खान (स्कीट), प्रकाश नानजप्पा (50 मी.पिस्टल) और खातून शूटर अपूर्वी चंदेला (10 मी. एयर राइफल) ने रियो ओलम्पिक के लिए क्वालिफाई किया है। इनमें मेराज अहमद खान का क्वालिफाई करना बहुत मायने रखता है क्योंकि स्कीट को भारत मंे बहुत संजीदगी से नहीं लिया जाता है।
मेराज इस मुकाबले में हिस्सा लेने वाले भारत के पहले निशानेबाज बनेंगे। भारत के अब तक आठ ही निशानेबाजों के क्वालिफाई कर पाने की वजह से कुवैत एशियाई शुटिंग चैम्पियनशिप का ओलम्पिक कोटा दर्जा छिन जाना था। इसमें भारत को सात-आठ निशानेबाजों के ओलम्पिक कोटा हासिल कर लेने की उम्मीद थी। लेकिन अब इंटरनेशनल ओलम्पिक कमेटी और आईएसएसएफ ने भारत मंेे 25 जनवरी से राजधानी दिल्ली में एशियाई ओलम्पिक करने का फैसला किया है। इसके बाद बहुत मुमकिन है कि भारत के 15 निशानेबाज रियो में निशाने साधने जाएं। कुश्ती में भारत ने लंदन में दो मैडल जीते थे। सुशील ने सिल्वर और योगेश्वर दत्त ने कांसे का मैडल जीता था। लेकिन इस बार खेल में तस्वीर बहुत साफ नहीं है क्योंकि अभी तक सिर्फ नरसिंह यादव ने आलमी चैम्पियनशिप मंे कांसे का मैडल जीतकर एक कोटा मकाम दिलाया है। इस कटैगरी में ही सुशील भी लड़ते हैं। इसलिए यह तय होना बाकी है कि इनमें से कौन हिस्सा लेने जाएगा।
लेकिन तीन-चार और पहलवानों के ओलम्पिक कोटा हासिल करने की उम्मीद है। इतना जरूर है कि भारत इस खेल मे खाली हाथ लौटने वाला नहीं है। मुक्केबाजी में विजेंदर के पेशेवर बनने से भारत को जरूर झटका लगा है। लेकिन भारत के पास शिव थापा, मनदीप जांगड़ा, सुमित सांगवान और गौरव बिधूड़ी के तौर पर शानदार मुक्केबाज हैं। इन सबसे ऊपर लंदन ओलम्पिक की कांसे का मैडल जीतने वाली मैरीकाम भी पीले तमगे पर हाथ आजमाने की कोशिश करेंगी। तीरंदाजी में दीपिका की अगुआई मंे भारत मैडल की उम्मीद कर सकता है। बैडमिंटन में भी भारत की सायना नेहवाल और पीवी सिंधु मैडल जीतने का दमखम रखती हैं।
सानिया मिर्जा ने पिछले साल दो ग्रैंड स्लैम समेत 10 खिताब जीतकर जिस तरह का जलवा बिखेरा था उससे इस खेल में भारत मैडल जीतने के मजबूत दावेदार के तौर पर उतरेगा। सानिया ने अभी तय नहीं किया है कि वह मिक्स्ड जोड़ी में लिएंडर पेस या रोहन बोपन्ना किसके साथ जोड़ी बनाकर खेलेंगी। लेकिन मर्द जोड़ी में लिएंडर पेस और बोपन्ना का खेलना तय है।
वैसे तो टेनिस के हिसाब से लम्बा वक्त बाकी है क्योंकि रियो ओलम्पिक के आने तक तीन ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट का इनअकाद हो चुका होगा। इसलिए अभी से खिलाड़ी की रंगत के बारे में कोई अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है। वैसे भी ओलम्पिक खेलों का यूएस ओपन के करीब इनअकाद होने से इसमें अच्छे खिलाडि़यों के हिस्सा लेने के इमकानात कम होंगे और इस सूरत में भारत के मैडल जीतने के इमकानात बेहतर होंगे। (बशुक्रिया नवभारत टाइम्स)